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भारत और सिंगापुर ने विधि एवं विवाद समाधान के क्षेत्र में सहयोग से संबंधित समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करना सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करने, विशेषज्ञता के आदान-प्रदान और हितधारकों के लिए क्षमता निर्माण संबंधी पहलों को सुविधाजनक बनाने पर ध्यान देने के साथ विधि एवं विवाद समाधान के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने की हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है: केन्द्रीय विधि मंत्री

भारत और सिंगापुर ने आज विधि एवं विवाद समाधान के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग से संबंधित एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। भारतीय पक्ष की ओर से भारत सरकार के विधि एवं न्याय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल और सिंगापुर पक्ष की ओर से सिंगापुर सरकार के संस्कृति, समुदाय एवं युवा मंत्री तथा द्वितीय विधि मंत्री श्री एडविन टोंग के बीच हुई एक वर्चुअल बैठक में इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।

यह समझौता ज्ञापन दोनों देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक विवाद समाधान; संबंधित देशों में मजबूत वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र को बढ़ावा देने व समझौता ज्ञापन के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए संयुक्त सलाहकार समिति की स्थापना से संबंधित मामले जैसे साझा हित के क्षेत्रों में आगे सहयोग करने से संबंधित है।

अपने वर्चुअल संबोधन में, श्री अर्जुन राम मेघवाल ने इस समझौता ज्ञापन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि, “इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करना विधि और विवाद समाधान के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने की हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसमें सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करने, विशेषज्ञता का आदान-प्रदान, और हितधारकों के लिए क्षमता निर्माण संबंधी पहलों की सुविधा प्रदान करने पर ध्यान केन्द्रित किया गया है। इस साझेदारी के माध्यम से, हमारा लक्ष्य हमारी कानूनी व्यवस्थाओं के बीच तालमेल बिठाना, अपनी शक्तियों का लाभ उठाना और हमारे नागरिकों एवं व्यवसायों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने हेतु नए दृष्टिकोणों का पता लगाना है।”

सिंगापुर सरकार के संस्कृति, समुदाय एवं युवा मंत्री तथा द्वितीय विधि मंत्री श्री एडविन टोंग ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने की सराहना करते हुए कहा कि, “सिंगापुर के भारत के साथ उत्कृष्ट, व्यापक-आधार वाले और बहुआयामी संबंध हैं। हमारे मजबूत आर्थिक और वाणिज्यिक संबंधों को देखते हुए, हमारे लिए विधि और विवाद समाधान के क्षेत्रों में अपने सहयोग को लगातार मजबूत करना अनिवार्य है। इससे हम अपने व्यवसायों और सिंगापुर एवं भारत के साथ व्यापार करने वालों को बेहतर समर्थन प्रदान करने में समर्थ होंगे। हम भारत के विधि एवं न्याय मंत्रालय के साथ-साथ भारत में विभिन्न कानूनी एवं विवाद समाधान उद्योग से जुड़े हितधारकों के साथ अपने अनुभवों का आदान-प्रदान करने और अपने संबंधों को मजबूत करने के लिए तत्पर हैं।”

इस प्रकार यह सहयोग विधि और विवाद समाधान के क्षेत्र में सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान पर ध्यान केन्द्रित करने के साथ-साथ भारत और सिंगापुर के बीच सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो अंततः वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र के माध्यम से विवादों के समाधान के लिए प्रभावी तंत्र को अपनाने में सक्षम बनायेगा।

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